Electric cars may only get cheaper from here!

Electric cars may only get cheaper from here: अगर आप इलेक्ट्रिक कार खरीदने का सोचा है लेकिन अभी तक आप लिया नहीं है और आप इसके दाम में गिरावट का इंतज़ार कर रहे है. तो आप का इंतज़ार करना सही हो सकता है. क्योकि भारत में बहुत कंपनी है जो आप को बहुत ही सस्ते दाम पर इलेक्ट्रिक कार देने का वादा किया है. जिसमे से टाटा मोटर्स, हुंडई और एमजी मोटर इंडिया इस साल भारत में अपनी इलेक्ट्रिक कारों पर भारी छूट देने में आगे रही हैं. और इसको और कम करने में लगे हुए है. कस्टमर को तो यही उम्मीद है की कंपनी और भी अपना रेट डाउन करेगा यह तो अब देखने वाला बात होगा.

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वैश्विक स्तर पर देखा जाये तो एलन मस्क की कंपनी टेस्ला चीन में BYD जैसे कंपनी के साथ अपना मूल्य बढ़ोतरी को लेकर अनुबंध किया है. इसलिए यह अपना रेट में कोई संसोधन नहीं कर सकता जबतक साथी कंपनी का मंजूरी नहीं हो.इस नियम को फोर्ड, टोयोटा, किआ और शेवरले ने भी इसका अनुसरण किया है.

ऐसा माना जा रहा है की इलेक्ट्रिक वाहनों पर और भी छूट हो सकता है,लेकिन यह तभी सम्भव है जब आप को लगे की कम्पनी को कार बनाने की लागत में कमी आया हो.या दूसरे शब्दो में कहे तो आप मान सकते है यदि इलेक्ट्रिक वाहन बनाने की लागत कम हो जाए तो इससे ईवी और भी सस्ती हो जाएंगी.

इलेक्ट्रिक गाड़ी के मंहगा होने का बहुत कारण है लेकिन इसमें से कुछ मुख्य कारण है. बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कम मांग के अलावा, गिरावट में सबसे बड़ा योगदान इसके बैटरी की लागत में गिरावट होने की संभावना है.

गोल्डमैन सैक्स के शोध के अनुसार ऐसा उम्मीद लगया गया है की 2025 तक सभी इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए बैटरी की कीमत में 40 % तक का गिरावट दर्ज किया जायेगा।सब कोई जानता है बैटरी की कीमतों में गिरावट एक वैश्विक प्रवृत्ति है.

ईवी बैटरियों की कीमत में गिरावट का अनुमान. स्रोत: गोल्डमैन सैक्स रिसर्च.

कुछ और रिपोर्ट को देखा जाये तो उस रिपोर्ट में बतया गया है.की भारत के बाजार में ईवी की कीमतों में उछाल पारम्परिक दहन वाली करो के बराबर होगा। इसके पीछे इसके बैटरी के दाम में बढ़ोतरी को देख कर बतया गया है.

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“ईवी के कीमत में बैटरियों का हिस्सा 35-40% है और, जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, यह 100 डॉलर प्रति किलोवाट से नीचे गिर गया है। इसलिए, कीमतों में कमी आना तय है और वे तेजी से नीचे आएंगी, ”नीति आयोग के पूर्व प्रमुख सलाहकार अनिल श्रीवास्तव ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए बतया.

ईवी बैटरी की कीमतें क्यों घटेंगी?

सबसे पहले, बैटरी बनाने में जो धातु इस्तेमाल होता है धातुओं की कीमत में पिछले 18 महीनों में तेजी से गिरावट दर्ज किया गया है.
19 अप्रैल को धातु का बंद भाव दिसंबर 2022 से गिर रहा है

  • लिथियम (चीन) $15876 प्रति टन, 77% अधिक
  • निकेल (एलएमई) 35% ऊपर $19326 प्रति टन पर
  • कोबाल्ट (एलएमई) 46% बढ़कर 27830 डॉलर प्रति टन हो गया

मेटल एक्सपर्ट का मानना है की लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसी धातुओं में मंदी का बाज़ार जारी रह सकता है. गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों को उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में कोबाल्ट में 12%, निकेल में 15% और लिथियम में 25% की गिरावट देखने को मिल सकता है. जिसका सीधा असर इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर पड़ेगा.

बैटरी की कीमतें गिरने का दूसरा कारण इनोवेशन है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा, बैटरी बनाने वाले कंपनी बैटरी को और सरल बनाने के लिए और भी कुछ नया तरीका का खोज कर रहा है. जिससे की बैटरी को जल्दी चार्ज किया जा सके.

सॉलिड-स्टेट बैटरियों का उद्भव अंतरिक्ष में नवाचार का एक और उदाहरण है.

सॉलिड-स्टेट बैटरियां ठोस (तरल के बजाय) इलेक्ट्रोलाइट्स की पतली परतों का उपयोग करती हैं, जो इलेक्ट्रोड के बीच लिथियम आयन ले जाती हैं।

सॉलिड-स्टेट बैटरियों का उपयोग शुरू में पेसमेकर और स्मार्टवॉच में किया जाता था.लेकिन अभी के समय में इनका उपयोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बैटरी बनाने में किया जा रहा है. क्योकि यह साधरण बैटरी की तुलना में अधिक ऊर्जा इस में स्टोर कर सकते है ,और बहुत जल्दी चार्ज हो जायेगा साथ ही यह बहुत कम ज्वलनशील होता है.

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